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बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन पत्रकारों के लिए लॉलीपॉप : राकेश कुमार गुप्ता

पटना । नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना 2019 का लागू करना सरकार का कदम स्वागतयोग्य है, परन्तु यह कदम पत्रकारों के लिए लॉलीपॉप जैसा है ।

जब चुनाव आता है तो बिहार सरकार पत्रकारों के हित के लिए सिर्फ झुनझुना थमा देती है पत्रकार हित में उसका निदान नहीं होता है जिसका लाभ जिला अनुमंडल प्रखंड लेवल के पत्रकार को कोई भी लाभ नहीं मिलता है वह उसी प्रकार जीते हैं जैसे पहले जीते थे ।

नेशनल जर्नालिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने कहा, “पत्रकार पेंशन मामले मेँ ज्यादा ख़ुश होने की जरुरत नहीं, खासकर मुफस्सिल पत्रकारों को पेंशन की पात्रता पर ध्यान दें ।”

गुप्ता का कहना है, वैसे पत्रकार जो किसी मिडिया हाउस या चैनल मेँ 20 वर्षो तक सेवा देंने कें वाद सेवानिवृत हुए हो उम्र 50 वर्ष( शायद ) इनके नही रहने की स्थिति मेँ इनके परिवार को तीन हजार रुपए दिया जाएगा ।”

उन्होंने कहा, मुफसिल पत्रकारों की बात 20 वर्ष का कार्यकाल कहाँ से साबित करेंगे ? अधिकांश अखबार ना तो परिचय पत्र दें रहा हैं और ना कोई पुर्जा ? उनका कहना है कि बिहार के कुछ पत्रकारों को ही इसका लाभ मिलेगा ।

उन्होंने यह भी बताया इस संगठन के द्वारा 20 सूत्री मांग पत्र सरकार के मंत्री को सौंपा गया है उस पर भी ध्यान दें । बिहार में पत्रकारों पर नीतीश सरकार में हमले में वृद्धि हुई है पत्रकार के हक में सभी बिंदु पर ध्यान देने वाली बात है पत्रकारों के साथ बहुत सारी समस्या है इसका निदान करना पत्रकार हित के लिए अनिवार्य है सरकार इस पर गंभीरता से विचार करें ।

एनजेए ने संगठन बिहार के तमाम सांसद विधायक मंत्री गण को 20 सूत्री पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए कार्यक्रम चला रही है जो कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा और ज्ञापन के माध्यम से सरकार को पत्रकार हित में जगाया जाएगा ।

नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की प्रमुख मांगे :

1 ) पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ‘‘जर्नलिस्ट  प्रोटेक्शन एक्ट’ (पत्रकार सुरक्षा कानून) बनाया जाये।                                             
2) पत्रकार उत्पीड़न की घटना और उनके  समस्याओं के निराकरण के लिए जिला स्तर तक ‘‘प्रेस परिषद आयोग’’ का गठन किया जाये अथवा पत्रकार मामले में एक अलग जांच एजेंसी का गठन करवायी जाये।

3) पत्रकार के मामले में “एफआईआर” होने से पहले मामले की जांच हो। पत्रकार के खबर मामले में आपराधिक/मानहानि के धारा को नहीं लगाया जाये।

4) मीडिया काउन्सिल क्लब बनाया जाय जिसमें बेव मीडिया भी शामिल हो।

5) पत्रकार मामले को लेकर मीडिया काउन्सिल के जरिए एडवोकेट मुहैया करवाया जाय।पत्रकार मीडियाकर्मी पर कवरेज के दौरान हमले को विषेश कानून के तहत दर्ज किया जाए।

6) मान्यता प्राप्त पत्रकार को हर महीने सरकार के तरफ से प्रोत्साहन राशि मिले और किसी भी सरकारी या गैरसरकारी स्थल पर हुए किसी घटना के मामलों में पत्रकार को कवरेज में रुकावट के लिए सरकारी कार्यों में बाधा की तरह देखा जाये ।

7) पत्रकार/मीडियाकर्मी को टोल टैक्स पुरे देश में निशुल्क किया जाये ।

8) पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामले की जांच के लिये कम से कम पीसीएस या आईपीएस अधिकारी द्वारा जांच हो।

9)  यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी पर झूठा मामला दर्ज किया जाता है और उसकी पुष्टि होती है तो झूठा मुकदमा करने वालों के खिलाफ आजीवन कारावास और अधिकतम जुर्माने का प्रावधान हो।

10) पत्रकार/मीडियाकर्मी की हत्या को रेयरेस्ट क्राइम के अंतर्गत रखा जाए।

11) कवरेज के दौरान घायल हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी का इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

12) यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी के परिजनों पर रंजिशन हमला किया जाता है तो उनका इलाज  अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

13)कवरेज के दौरान अथवा किसी मिशन पर काम करते हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए।

14) सभी प्रशासनिक व विभागीय बैठकों में पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य की जाये।

15) पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज हेतु  रेलवे में यात्रा के लिये आरक्षण एवं किराया में रियायत का प्रावधान की जाये।

16) पत्रकार/मीडियाकर्मी को मिले धमकियां  पर उसकी सुनवाई शीघ्र हो और उन्हें तत्वरित  सुरक्षा प्रदान की जाए।

17) राज्य एवं केन्द्र के स्तर पर “पत्रकार आर्थिक सुरक्षा निधि” योजना का संचालन हो तथा 1000000(दस लाख) का नि:शुल्क स्वास्थ बीमा सुनिश्चित की जाए ।

18) मीडियाकर्मी ऋण योजना बैंको द्वारा संचालित करवायी जाये।

19) पत्रकार/मीडियाकर्मियों के बच्चों के लिये अच्छे शिक्षण संस्थानों में कोटा हो अथवा उनकी फीस में रियायत हो।

20) सुरक्षित पत्रकारों को आत्मरक्षा हेतु शस्त्र लाइसेन्स आवेदन के 15 के अन्दर बिना एन.एस.सी. के वरियता के आधार पर लाइसेन्स प्रपत्र जारी किया जाये।

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